छपन छपाई
हिन्दी ब्लॉगिंग के विशाल संसार में मेरा छोटा सा छापाखाना
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Cost of having a girlfriend ! : आई नेक्स्ट 13 नवम्बर 2012 'खूब कही' स्तंभ में प्रकाशित
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गर्ल फ्रेंड का जिक्र आने पर जिनकी बांछें खिल जाती हैं वे कई गुणा हैं, उनके चेहरे पर खुशी लाने के लिए पचास करोड़ रुपये उल्लेखनीय भूमिका...
दिवाली में शिफ्ट हो रहे गिफ्ट : दैनिक राष्ट्रीय सहारा में 12 नवम्बर 2012 को प्रकाशित
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क्लिक करें और पढ़ें दिवाली के नाम पर दिवाला दिलवालों का निकलता है। सेल के नाम पर बचा खुचा सब माल गोदामों से निकल जाता है। सब छूट से खिंच...
खुलासामैन की ओपन दीपावली : दैनिक हिंदी मिलाप में 'बैठे ठाले' स्तंभ में प्रकाशित
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दीवाली के नाम पर दिवाला दिलवालों का निकलता है। सेल के नाम पर बचा खुचा सब माल गोदामों से निकल जाता है। सब छूट से खिंचे चले आते हैं और से...
सुकून देने वाली तीखे तेवर की व्यंग्य रचनाएं : दैनिक जनवाणी के रविवाणी परिशिष्ट में 'पुस्तक समीक्षा' प्रकाशित
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फेसबुक पेज https://www.facebook.com/VyangyaKaShoonyakaal चश्मा रहित पाठन के लिए क्लिक कीजिएगा।
खुलासामैन की ओपन दीपावली
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दीवाली के नाम पर दिवाला दिलवालों का निकलता है। सेल के नाम पर बचा खुचा सब माल गोदामों से निकल जाता है। सब छूट से खिंचे चले आते हैं और सेल म...
अनचाहे एमएसएस पाने वालों को भी मिले रकम : नवभारत टाइम्स दैनिक 9 नवम्बर 2012 पेज 12
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क्लिक करके अपने फायदे की डील जानें
प्रेमिकाओं के रेट में इज़ाफा : जनसंदेश टाइम्स 8 नवम्बर 2012 को उलटबांसी में प्रकाशित
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गर्ल फ्रेंड का जिक्र आने पर जिनकी बांछें खिल जाती हैं वे कई गुणा हैं, उनके चेहरे पर खुशी लाने के लिए पचास करोड़ रुपये उल्लेखनीय भूमिका ...
शून्यकाल से आया व्यंग्य : सोपान स्टेप मासिक पत्रिका के नवम्बर 2012 अंक में पुस्तक समीक्षा
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क्लिक करिए और पढि़ए यूं ही दिख रहा है आवरण
भ्रष्टाचार में विकास की संभावनाएं : दैनिक जनवाणी स्तंभ 'तीखी' नज़र' 6 नवम्बर 2012 अंक में प्रकाशित
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चश्मारहित पाठन के लिए मुझे चटकाएं भ्रष्टाचार करना और मिटाना दोनों आजकल बतौर कैरियर खूब पसंद किए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार को इस समय स...
व्यंग्य का शून्यकाल : पाखी मासिक पत्रिका के अक्टूबर नवम्बर 2012 के सुंयुक्तांक में
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व्यंग्य का शून्यकाल अपनी मित्र पुस्तकों के साथ पाखी में जमावड़ा जमा है पुस्तकों का
कैमरों से पंगा, नहला देंगे गंगा : दैनिक मिलाप स्तंभ 'बैठे ठाले' 3 नवम्बर 2012 में प्रकाशित
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कैमरे फुलटॉस खुंदक में हैं। सवाल पत्रकारों ने पूछा और वे हमारे से चिढ़ गए , क्विटलों गालियां फेंकीं और धमकाते हुए भिड़ गए। हमें तोड़ ...
1 टिप्पणी:
फेरबदल नहीं है चोरी : दैनिक जनवाणी स्तंभ 'तीखी नज़र' 30 अक्टूबर 2012 में प्रकाशित
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मौन रहके कोई कितना मुखर हो सकता है , मौनी बाबा से बेहतर मिसाल नहीं मिलेगी। उनके कुनबे में फेरबदल होती है तो शतरंज की तरह मोहरे बदले ज...
फेरबदल का फेर : दैनिक जनसत्ता 31 अक्टूबर 2012 की चौपाल में प्रकाशित
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क्लिक कीजिए और पढि़ए मौन रहके कोई कितना मुखर हो सकता है , मौनी बाबा से बेहतर मिसाल नहीं मिलेगी। उनके कुनबे में फेरबदल होती है तो शतरं...
फेरबदल, फेरबदल, फेरबदल : दैनिक देशबंधु 31 अक्टूबर 2012 के अंक में प्रकाशित
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मौन रहके कोई कितना मुखर हो सकता है , मौनी बाबा से बेहतर मिसाल नहीं मिलेगी। उनके कुनबे में फेरबदल होती है तो शतरंज की तरह मोहरे बदले जात...
कैमरों से पंगा, कर देंगे नंगा : जनसंदेश टाइम्स 30 अक्टूबर 2012 में 'उलटबांसी' स्तंभ में प्रकाशित
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क्लिक करिए और यहीं पर पढि़ए कैमरे फुलटॉस खुंदक में हैं। सवाल पत्रकारों ने पूछा और वे हमारे से चिढ़ गए , क्विटलों गालियां फेंकीं और ...
कैमरों से पंगा ... : आई नेक्स्ट स्तंभ 'खूब कही' 30 अक्टूबर 2012 में प्रकाशित
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क्लिक करें और पढ़ लीजिए कैमरे फुलटॉस खुंदक में हैं। सवाल पत्रकारों ने पूछा और वे हमारे से चिढ़ गए , क्विटलों गालियां फेंकीं और धमकात...
नेशनल दुनिया की पत्रिका 28 अक्टूबर 2012 में 'व्यंग्य का शून्यकाल' का परिचय
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पुस्तक का परिचय किंतु लेखक का पूरा नाम भी नहीं
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