छपन छपाई
हिन्दी ब्लॉगिंग के विशाल संसार में मेरा छोटा सा छापाखाना
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आसाराम से भगवन की गुपचुप गुफ्तगू
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परिक्रमा का अर्धसत्य : दैनिक जनसंदेश टाइम्स स्तंभ 'उलटबांसी' 3 सितम्बर 2013 अंक में प्रकाशित
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सौ टंच की गरीबी : दैनिक हरिभूमि 14 अगस्त 2013 में प्रकाशित
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टमाटर का कड़वा रस : डीएलए 19 जुलाई 2013 में प्रकाशित
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टमाटर और सेब दोनों लाल और दोनों आजकल मिल रह हैं बढ़े भाव। मैं शहंशाह होता तो जरूर ‘टमाटरमहल’ बनवाता क्योंकि सेब के भाव बहुधा बढ़े होते...
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तेजाब, तमाशा और मस्त सरकार : जनसंदेश टाइम्स 16 जुलाई 2013 में 'उलटबासी' प्रकाशित
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सच्चाइयां मनोरंजन नहीं करतीं : जनवाणी दैनिक स्तंभ तीखी नजर 2 जुलाई 2013 अंक में प्रकाशित
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सट्ठे का पट्ठा : कल्पतरू एक्सप्रेस 14 जून 2013 में प्रकाशित
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आजकल मासिक के जून 2013 अंक में 'व्यंग्य का शून्यकाल' की समीक्षा प्रकाशित : पढि़एगा मत
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बालमन के पर्यावरण को दूषित होने से बचाएं : डेली न्यूज एक्टिविस्ट 6 जून 2013 के ब्लॉग राग स्तंभ में प्रकाशित
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इस्तीफों और लतीफों की बन आई : जनवाणी 4 जून 2013 में प्रकाशित
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मुझ पर करें क्लिक और लिंक का देखें धमाल
क्रिकेट नाम सत्य है ... : मिलाप स्तंभ 'बैठे ठाले' 29 मई 2013 में प्रकाशित
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स्पॉट फिक्सिंग की सुनो कहानी : मिलाप में स्तंभ 'बैठे ठाले' में 22 मई 2013 को प्रकाशित
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इस व्यंग्य को आप यू ट्यूब प र मेरी आवाज में भी सुन सकते हैं।
किसानों को आत्महत्योपरांत सम्मान : श्री टाइम्स दैनिक 13 मई 2013 स्तंभ 'प्रजातंतर' में प्रकाशित
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मन रे गा अब मिलेगा जॉब कार्ड : दैनिक डीएलए 7 मई 2013 में प्रकाशित
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मनरेगा बोले तो मायने यही हैं। मन रे गा खूब लूट लूट। मत देना किसी को कोई छूट छूट। कर देते हैं सभी को शूट शूट। सभी कवि नहीं होते हूट हूट।...
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श्रम दिवस बनाम शर्म दिवस : दैनिक हिंदी मिलाप 1 मई 2013 के 'बैठे-ठाले' स्तंभ में प्रकाशित
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रस्म का दिन : दैनिक जनसत्ता 30 अप्रैल 2013 के समांतर स्तंभ में प्रकाशित
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खामियों से उपजता व्यंग्य : आलोक सक्सेना की पुस्तक गाड़ी सरकारी दफ्तर की हरिभूमि रविवारी अंक 21 अप्रैल 2013 में प्रकाशित पुस्तक समीक्षा
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राम की चिडि़या देश हमारा : दैनिक नेशनल दुनिया स्तंभ चिकोटी 17 अप्रैल 2013 अंक में प्रकाशित
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मूर्खता की वर्षगांठ 1 अप्रैल : मधुर सरस मासिक पत्रिका के अप्रैल 2013 अंक में प्रकाशित
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पूरी पत्रिका यहां पर पढ़ सकते हैं, क्लिक करना होगा।
राम जी की चिडि़या : दैनिक कल्पतरू एक्सप्रेस 13 अप्रैल 2013 अंक में प्रकाशित
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फिल्में हैं मारधाड़ का बाज़ार : बौलीवुड सिने रिपोर्टर 10 से 16 अप्रैल 2013 अंक में प्रकाशित
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अट्टहास मार्च 2013 हास्य-व्यंग्य : निहार लीजिए, मन करे तो पढ़ लीजिए
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हिंदी फिल्मों की रसमलाई है प्यार
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मूर्ख दिवस पर गधे का सोचनामा : दैनिक मिलाप में 1 अप्रैल 2013 को स्तंभ बैठे ठाले में प्रकाशित
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जी हां, मैं गधा हूं। हैरान हो गए जबकि इसमें आश्चर्यभ्रमित होने की कोई बात नहीं है क्योंकि अगर मैं अपनी पहचान जाहिर न करता तो आप मुझे ...
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मुन्नाभाई माफी मांग रहा है : बॉलीवुड सिने रिपोर्टर के होली विशेषांक में प्रकाशित
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