ओ पीपी, क्‍यों बढ़ा रही हो बीपी : दैनिक जनसंदेश टाइम्‍स में 21 अप्रैल 2011 को प्रकाशित व्‍यंग्‍य

1 टिप्पणी:

  1. अविनाश जी आपने तो पीपी (पूनम पाण्डेय) की पीपी बजा दी... :-)

    उत्तर देंहटाएं

ऐसी कोई मंशा नहीं है कि आपकी क्रियाए-प्रतिक्रियाएं न मिलें परंतु न मालूम कैसे शब्‍द पुष्टिकरण word verification सक्रिय रह गया। दोष मेरा है लेकिन अब शब्‍द पुष्टिकरण को निष्क्रिय कर दिया है। टिप्‍पणी में सच और बेबाक कहने के लिए सबका सदैव स्‍वागत है।