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हिंदी ब्लॉगिंग में घूमने से कमाई : लीगेसी इंडिया अगस्त 2012 'ब्लॉगरी' स्तंभ में प्रकाशित


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चाहते हैं
घूमना और घूमने से पहले ही घूमना। निश्चिंत रहें यह घूमना सुबह की सैर नहीं है, इस सैर से
किसी को भी बैर नहीं है। विरले ही होते हैं जो घूमना नहीं चाहते, जानी-अनजानी
जगहों पर जाने से परहेज करते हैं। जो घूमने को सिर्फ पर्यटन के नाते पहचानते हैं
और एक महंगा शौक मानते हैं, वे भी अब घूमने के लिए तैयार हो जाएं। हिंदी ब्लॉगिंग के
आगमन के साथ ही घूमने का एक नया तरीका विकसित हुआ है जिसका अवलोकन आप हिंदी ब्लॉगर
नीरज जाट के लोकप्रिय और चर्चित ब्लॉग ‘मुसाफिर हूं यारो’ पर कर सकते हैं। वैसे तो सारा जीवन ही भ्रमण है। भ्रमण
घनचक्करी नहीं है। भ्रमण इस सृष्टि पर है, पृथ्वी पर है जबकि मन की उड़ान
के लिए तैयार सारा जहान है। जहां नहीं जा सकते, चांद, सितारे, चन्द्रमा, मंगल, शुक्र, पाताल, आकाश, वहां पर खोज
करने के बहाने मानव ने घूमने की तकनीक विकसित कर ली है। कल्पना की उड़ान से बेहतर
पर्यटन और भ्रमण का कोई मुकाबला नहीं है। घूमने वाले तो सपनों में भी घूम लेते
हैं। इसे कहते हैं‘मन के जीते जीत है’ और यह जीत ही है, जिसमें किसी
प्रकार की हार नहीं है।
नीरज अपने ब्लॉग
पर रेल से घूमने का विवरण और उन जगहों के नक्शे पूरे विस्तार के साथ अपने ब्लॉग
पर पेश करते चलते हैं और सबके मन में कौतूहल और जज्बे की आग लगा देते हैं। आग उन
स्थानों को घूमने की, जहां जाने का मन होता है परंतु जानकारी नहीं होती। अखबार
में पढ़ा है, सहेजा नहीं। अब इन दिक्कतों से पार पाने के लिए आप बेहिचक
(http://neerajjaatji.blogspot.in/) दौड़े चले आइए और अपने घूमने के सपने को बुलंदियों का
आकाश घुमाइए।
जब नीरज कहते
हैं कि ‘’घुमक्कड़ी जिंदाबाद ...
पर्यटन एक महंगा शौक है। समय खपाऊ और खर्चीला। जबकि घुमक्कड़ी इसके ठीक विपरीत है। यहां पर आप देखेंगे
किस तरह कम समय और सस्ते में बेहतरीन घुमक्कड़ी की जा सकती
है। घुमक्कड़ी के लिये रुपये-पैसे की जरुरत नहीं है, रुपये -पैसे की जरूरत है टैक्सी वाले को,जरूरत है होटल वाले को। अगर यहीं पर
कंजूसी दिखा दी तो समझो घुमक्कड़ी सफल है।‘’ तो यकीन मानिए वे बिल्कुल सच कह रहे हैं।
नीरज जहां
घूमे हैं, उन स्थलों और राज्यों की सूची रेल की तरह लंबी है और जहां
घूमने जाने वाले हैं, वह छोटी है’ इसी तरह का ध्यान धरकर वे खूब
घूम रहे हैं और अपने पाठकों से अपने घुमक्कड़ी के अनुभवों को साझा कर रहे हैं।
राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड
इत्यादि स्थलों, मंदिरों, पहाड़ों के बेहतरीन संस्मरण और मौसम उनके ब्लॉग पर आपका
बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन आप किसकी प्रतीक्षा में हैं। अगर आप कमाई की
सोच रहे हैं तो इससे आय भी होती है लेकिन उस रहस्य से रूबरू होने के लिए आपको
अवश्य ही नीरज जाट के हिंदी ब्लॉग ‘मुसाफिर हूं यारो’ की यात्रा तो करनी ही होगी श्रीमान्।
...
हिंदी ब्लॉगर डॉ. रुपेश श्रीवास्तव का अंतहीन सफर : लीगेसी इंडिया मासिक के जून 2012 अंक में प्रकाशित
प्रतिबिम्ब में प्रकाशित विवेक श्रीवास्तव को विवेक रस्तोगी पढ़ें। स्मृति के कारण गलत नाम छपने के लिए खेद है। 

बुराई है, अच्छाई है। सुख है, दुख है। जीवन है,मृत्यु है। सभी एक दूसरे पर अवलंबित हैं। पत्रिकाएं हैं, लिखा जा रहा है। लिखा जा रहा है, छप रहा है। जो छप नहीं रहा, उस छिपे हुए को सामने लाने के लिए बतौर न्यू मीडिया एक महाशक्ति का आविर्भाव हुआ है। जो कहा जा रहा है, वह अब अधिक लोगों तक पहुंच रहा है। विचार जो उत्तम हैं अथवा निकृष्ट हैं, अधिक से अधिक देश, प्रदेश और विदेश की सीमाओं तक सीधे पहुंच रहे हैं। जिन पर सार्थक विमर्श हो रहा है और बेमतलब की बहस और विवाद भी हो रहे हैं। सबके अपने अपने तर्क हैं, अपने अपने फायदे और नुकसान हैं, यही नियति है, जीवन की गति है।
9 मई 2012 के दिन प्रत्येक उस नेक संवेदी दिल को धक्का लगा जो सिर्फ अपने लिए नहीं जीते। समाज में निराश्रितों और वंचितों के लिए जीवन जीने में यकीन रखते हैं। भड़ासफेम हिंदी ब्लॉगर डॉ. रुपेश श्रीवास्तव (http://bharhaas.blogspot.in/) के दिल को आघात लगा। वह घात उन्हें समेट कर ले गया और हमें एकाएक स्तब्ध कर गया। जीवन की कडि़यों में बहुत कुछ टूट बिखर जाता है। लेकिन वही टूटना-बिखरना जीवन को जीवंतता प्रदान करता है। डॉ. रुपेश को यूं ही हरफनमौला नहीं कहा गया है। ऐसे व्यक्तित्व विरले ही होते हैं जो सामने वाले के दुख में एकाकार हो जाते हैं। इंसान में कितनी ही बुराईयां हों लेकिन सामने वाले के दुख में एकाकार होना, बुराईयों को मिटा कर जीवन को गति प्रदान करता है। डॉ. रुपेश श्रीवास्तव से पहली मुलाकात गोवा से दिल्ली वापसी पर मुंबई में हिंदी ब्लॉगर साथियों से मिलने-जानने के दौरान 6 दिसम्बर 2009 को एक सप्ताह के मुंबई प्रवास में हुई।
सभी साथी पहली बार रूबरू हुए। कवि गोष्ठियों में मुलाकात हुई। रचनाओं से रूबरू हुए। विचारों और एक दूसरे को जानने-समझने के लिए ही तो मुंबई ब्लॉगर मीट संजय गांधी नेशनल पार्क में त्रिमूर्ति जैन मंदिर में आयोजित की गई, जिसमें उल्लेखनीय भूमिका विवेक रस्तोगी और महावीर बी सेमलानी की रही। मुंबई की व्यस्त जिंदगी में सूरत और पनवेल से आकर फुर्सत के पल निकालना मुझे अभिभूत कर गया। मैं कोई सेलीब्रिटी नहीं था लेकिन सबने मिलने पर मुझे ऐसा अहसास करा दिया और उनमें डॉ. रुपेश की आत्मीयता स्मृतियों में जिंदा है। अल्पायु में डॉ. रुपेश का जाना मर्माहत कर गया है। सामूहिक ब्लॉग नुक्कड़ के मॉडरेटर की ओर से एक जीवट व्यक्तित्व के धनी डॉ. रुपेश श्रीवास्तव को भावभीने श्रद्धासुमन। उनके दिखाए रास्ते पर दौड़कर हम सबको मानवता का भला करना चाहिए। यह जज्बा चित्रकार एडम के प्रति उनके पितृतुल्य लगाव को महसूस कर जाना जा सकता है। भड़ास के कुशल मॉडरेटर के रूप में उन्होंने अभिव्यक्ति को काफी उच्च स्वर दिए हैं और उनके जाने से भी यह सच्ची सोच और कहन कभी न रुककर, मानवीयता के धरातल को और पुख्ता करेगी।
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