तरबूज बम का फेशियल : हरिभूमि 13 जून 2011 में प्रकाशित व्‍यंग्‍य


2 टिप्‍पणियां:

  1. लेकिन व्यंग्य पढ़ें कैसे? फोटो पर क्लिक करने पर भी इतनी बड़ी नहीं हो रही है कि पढ़ी जा सके... अगर टेक्स्ट भी साथ में दाल देते तो पढने में आसानी होती.

    प्रेमरस

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  2. शाहनवाज भाई पढ़ने के‍ लिए सदैव http://avinash.nukkadh.com/ यहां पर आइए। यहां पर टैक्‍स्‍ट ही मिलेगा

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ऐसी कोई मंशा नहीं है कि आपकी क्रियाए-प्रतिक्रियाएं न मिलें परंतु न मालूम कैसे शब्‍द पुष्टिकरण word verification सक्रिय रह गया। दोष मेरा है लेकिन अब शब्‍द पुष्टिकरण को निष्क्रिय कर दिया है। टिप्‍पणी में सच और बेबाक कहने के लिए सबका सदैव स्‍वागत है।