रुक रुक रुक अरे महंगाई रुक : डीएलए 31 अगस्‍त 2011 में प्रकाशित


1 टिप्पणी:

  1. यह कहा रुकेगी..... यह तो अविकल धारा से बहती आई है और बहती जाएगी...

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ऐसी कोई मंशा नहीं है कि आपकी क्रियाए-प्रतिक्रियाएं न मिलें परंतु न मालूम कैसे शब्‍द पुष्टिकरण word verification सक्रिय रह गया। दोष मेरा है लेकिन अब शब्‍द पुष्टिकरण को निष्क्रिय कर दिया है। टिप्‍पणी में सच और बेबाक कहने के लिए सबका सदैव स्‍वागत है।