मन रे गा अब मिलेगा जॉब कार्ड : दैनिक डीएलए 7 मई 2013 में प्रकाशित



मनरेगा बोले तो मायने यही हैं। मन रे गा खूब लूट लूट। मत देना किसी को कोई छूट छूट। कर देते हैं सभी को शूट शूट। सभी कवि नहीं होते हूट हूट। फेसबुक मन की कहन का रूट रूट। सबको करता है सूट सूट। मन रे गा, मन तो गाएगा, मन तो गाए जा, मन एक बंजारा है गाता जाएगा, मनवा को बहकाए जाएगा। झूठा हो या सच्‍चा हो, मन का तनिक न कच्‍चा हो। फेसबुक दे रहा गच्‍चा, मन को लगे चाहे अच्‍छा, संभल कर रहना सब बच्‍चा।  मन रे गा कमेंट कमेंट। मिले सबकी अब खूब पेमेंट। मन रे गा लाइक लाइक। जल जाती है दिमाग की लाइट लाइट। जिंदगी में सब नहीं राइट राइट। मन रे गा हाइड हाइड। मन रे गा साइड साइड। मन रे गा से बना फ्यूचर ब्राइट। मन रे गा जेल जेल। नेताओं को मिलती बेल बेल। मन रे मत गा बलात्‍कार। बंद क्‍यों नहीं होता दुष्‍कर्मी व्‍यापार।
मन जो गाता है, वह सबको नहीं भाता। मन रे गा मंत्री जादूगर। मन रे गा अब लेगा जान। संसद में मंत्री की अटकी रहती जान। संसद में बसते मंत्री के प्राण। संसद सब दुखों से दिलाती त्राण। देश को लूट लूटकर खाएगा, सांसद वही कहलाएगा। हरेक मंत्री मंत्र की महिमा पहचान चुका। संसद है जादूगर की कुटिया, यह जान चुका।  तिजोरियों में भर रहा है काला झूठ। काला करता सबको सूट सूट। मन चंगा तो कठौती में गंगा। मन नहीं चंगा, संसद में रोज होता पंगा। पब्लिक को सब नेता मिल कर नंगा।
मन रे गा विकास के गीत गीत। मन कर ले सबसे प्रीत प्रीत। मन को ले तू जीत जीत। चुनाव अब आने वाला है। मन रे गा चुनाव चुनाव। नोटों की चला अब नाव नाव। मन रे गा मनरेगा का मतवाला है। विजय का बनना चाहता साला है। साला न कोई गाली है। रिश्‍तेदारी निकाली है। जोरू से बढ़कर होती है साली। मन रे गा चीख चीख। नहीं देनी किसी को अब से भीख। सारी खुदाई दूसरी तरफ, जोरू का भाई अपनी तरफ। मन रे गा मत तड़प तड़प। अब तू हो जा कड़क कड़क। मन नहीं बढ़ता सड़क सड़क। मन चाहता है जी तड़क भड़क। मन रे गा हवा हवाई। लेकर भाग गया भौजाई।
मन रे गा लोकपाल। लोक को पागल कर जाएगा। किसी को नजर नहीं आएगा।  संसद में घुस शोर मचाएगा। संसद हो जाए सख्‍त तख्‍त। देश का कानून न बने दरख्‍त। मनपसंद फल नहीं खायेंगे तभी विकास कर पाएंगे। मन रे गा मत याद दिला गरीब। चुनावों में बनता गरीब रकीब। मन रे गा सब रजामंद। रजामंद सब बने जयचंद। संसद को बेच खाएंगे। काठ की हांडी में पकाएंगे। मन रे गा मत सूत कपास। जूतमजूता लात कुबात। नेता को याद दिला औकात। मन रे गा, मन रे गा, मनरेगा। मन रे गा मिले अब जॉब कार्ड।

3 टिप्‍पणियां:

  1. मन रे गा का अर्थ ही है खा खा के मन नहीं भरेगा ...

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  2. ठीक ही तो है ,मनरेगा का अर्थ ही यही है, मन रे गा गा कर लूट,देश को ,जनता को.बिना काम लोगों को पैसा बाँट,और वोटों को लूट,महा निकम्मा बना लोगों को,गाँधी बाबा के नाम पर,उनको भी साझेदार बना कर,टैक्स पेअर को लूट,अपनी जेब से कुछ न जाये ,उल्टा अपनी जेब में आये,नेता खाए ,अफसर खाएं,जनता भी कुछ खुरचन खाए,फिर कब मिलेगी ये छूट. मनरेगा तू खूब लाया,गाँधी नाम पर लूट,ऐसी तो कभी न मिलती राम नाम की भी लूट.वाह रे मनरेगा जुग जुग जियो

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