असली बापू से नकली बापू की मुंहजोरी : डेली न्‍यूज़ ऐक्टिविस्‍ट 4 अक्‍टूबर 2013 स्‍तंभ 'ब्‍लॉग राग' में प्रकाशित


1 टिप्पणी:

  1. गाँधी कब का भूलते, दो अक्तूबर दोस्त |
    दायें बीयर बार पब, बाएं बिकता गोश्त |
    बाएं बिकता गोश्त, पार्क में अनाचार है |
    उधम मचे बाजार, तडपती दिखे नार है |
    इत मोदी का जोर, बड़ी जोरों की आँधी |
    उत उठता तूफ़ान, दिखा गुस्से में गाँधी ||

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