ब्लॉगर मीट में जिसका नाम है FIND RAJASTHAN
आप सभी आमंत्रित हैं
रानी जिला पाली राजस्थान मैं दिनांक 1 व 2 मई को आयोजित होने वाले ब्लॉगर मीट में जिसका नाम है FIND RAJASTHAN
इसमें प्रथम दिवस में आने के बाद आराम विश्राम के पश्चात परिचय सत्र का आयोजन किया जायेगा, इसके पश्चात रात्रि के समय एक गोष्ठी होगी जिसमे कुछ ज्वलंत मुद्दों पर आप सभी ब्लागरों से चर्चा की जायेगी
दुसरे दिन नजदीकी भ्रमण स्थान रणकपुर जैन मंदिर जो की विश्व प्रशिद्ध है का भ्रमण किया जायेगा .
नजदीकी रेलवे स्टेशन रानी और फालना है जयपुर दिल्ली और मुंबई तक से सीधी ट्रेन सुविधा है साथ ही बिहार और उत्तर प्रदेश से भी कई ट्रेने चलती है
आप केवल अपना स्थान बता दीजिये पूर्ण ट्रेन की समय सारणी भिजवा दी जाएगी
कृपया कर आने वाले ब्लॉगर अपना नाम दिनांक 25 अप्रेल तक दे देवें ताकि कार्यक्रम की रुपरेखा प्रकाशित हो सके
संपर्क करें bloggermeet@naradnetwork.in
tarun@naradnetwork.in
Mobile No. 9251610562
JAI HIND
रानी जिला पाली राजस्थान मैं दिनांक 1 व 2 मई को आयोजित होने वाले ब्लॉगर मीट में जिसका नाम है FIND RAJASTHAN
इसमें प्रथम दिवस में आने के बाद आराम विश्राम के पश्चात परिचय सत्र का आयोजन किया जायेगा, इसके पश्चात रात्रि के समय एक गोष्ठी होगी जिसमे कुछ ज्वलंत मुद्दों पर आप सभी ब्लागरों से चर्चा की जायेगी
दुसरे दिन नजदीकी भ्रमण स्थान रणकपुर जैन मंदिर जो की विश्व प्रशिद्ध है का भ्रमण किया जायेगा .
नजदीकी रेलवे स्टेशन रानी और फालना है जयपुर दिल्ली और मुंबई तक से सीधी ट्रेन सुविधा है साथ ही बिहार और उत्तर प्रदेश से भी कई ट्रेने चलती है
आप केवल अपना स्थान बता दीजिये पूर्ण ट्रेन की समय सारणी भिजवा दी जाएगी
कृपया कर आने वाले ब्लॉगर अपना नाम दिनांक 25 अप्रेल तक दे देवें ताकि कार्यक्रम की रुपरेखा प्रकाशित हो सके
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हाई टेक होली का जमाना
खुद ही निपट जाती सरकार
महंगाई का चिल्लाना सरकार सह नहीं सकती है, इसकी चिल्लाहट से सरकार के संकट में घिरने भय रहता है इसलिए साईलेंट किलर की तरह सक्रिय रखा जाता है और जनता चिल्लाती रहती परंतु सरकार उस ओर से बेफिक्र है, यह बेफिक्री पांच साल के लिए तय है। सरकार सब कुछ बर्दाश्त कर सकती है परंतु महंगाई का रोना उसे स्वीकार्य नहीं है। भ्रष्टाचार तो अनेक रूपों में मौजूद है। आप किस किसको हटायेंगे। दूसरों को हटाते हटाते अपना मुख भी उन्हीं में दिखलाई देगा और आप हटाते हटाते शर्मा जायेंगे, फिर नहीं हटा पायेंगे और भ्रष्टाचार को हटाने के कार्य से खुद ही किनारा कर जायेंगे। भ्रष्ट आचार रिश्वत भी है, तीखा बोलना भी है, झूठ बोलना भी है और सच्चाई जानते हुए मौन रहना भी भ्रष्ट आचार ही माना गया है। भ्रष्टाचार का दायरा बहुत व्यापक है। जितने रियलिटी शो हैं, सब भ्रष्टाचार के नये नये खुले अड्डे है। क्रिकेट तो ऐसा खेल है, जिसमें जब तक भ्रष्टाचार न शामिल हो, उसमें भरपूर रंग-तरंग का अहसास ही नहीं होता है। फिर भ्रष्टाचार एक ऐसा भूत है, जो अतीत है, पर सामने मौजूद है, मतलब वर्तमानीय भूत। आज भी और अतीत भी तथा भविष्य भी। इस भूत की पेड़ पर उल्टी लटक इतनी मजबूत है कि पेड़ टूट जाए, पर इसकी अकड़ इतने गहरे तक पैठ चुकी है कि जाती नहीं । अतीत, वर्तमान और भविष्य में अपनी पूरी चमक दमक के साथ मौजूद भ्रष्टाचार भूत होते हुए भी मौजूद हैं। सबके अपने भरपूर भरे-पूरे जलवे हैं। महंगाई को दानव बतलाया जा रहा है, जबकि वो स्त्रीलिंग है और स्त्रीलिंग होते हुए भी महंगाई की मजबूती प्रत्येक प्रकार के देवता और पुरूष दोनों को मात करती है, इसलिए दानव कहलाई जाती है। वरना इसे दानवी भी कहा जा सकता था, अभी तक तो यूं ही लगता था कि दानव से दानवी अधिक शक्तिशाली होती है परंतु महंगाई को दानव कहकर यह मिथक भी तोड़ डाला गया है। मिथक मिथ्या होते हुए भी संस्कृति और मन में इस कदर बस जाते हैं कि वे आरंभ से रचे हुए नजर आते हैं। फिर भी यह पता लगाना बहुत मुश्किल होता है कि वे आरंभ हुए थे, ऐसा जान पड़ता है, मानो सृष्टि-संस्कृति का अटूट रिश्ता हों और उनसे निजी रिश्ते बन जाते हैं जो कभी मिट नहीं पाते हैं। महंगाई और भ्रष्टाचार को भूत और दानव बतलाकर ऐसी जुगलबंदी को बेनकाब किया गया है, जो पहले से ही निर्वस्त्र है परंतु इसका श्रेय लूटने से भला सरकार क्यों वंचित रहे। |
| http://119.82.71.95/haribhumi/Details.aspx?id=26741&boxid=30177040 |
भ्रष्टाचार और महंगाई का तांडव
| http://www.webmilap.com/index.php/hindi-editorial |
भ्रष्टाचार और महंगाई पर सरकार प्रहार करेगी परंतु हमेशा की तरह हार जाएगी । इस हार में ही जीत है क्योंकि सरकार जीत गई तो महंगाई और भ्रष्टाचार दोनों ही नाराज हो जायेंगे। दोनों जब खुश हैं तब तो यह सौंदर्य है, अगर नाराज हो गईं तो न जाने कितनी फिल्मों में मुख्य भूमिका में दिखलाई दें। सरकार जनता को खुश करने के लिए इन पर गाहे-बगाहे प्रहार रूपी हार पहनाती रहती है और आत्म-मुग्ध रहती है। जिससे सामंजस्य और सौहार्दपूर्ण मौसम बना रहता है। भ्रष्टाचार को भूत और महंगाई को दानव बतलाने वाली सरकार रावण से तो मुक्ति पा नहीं सकी और सच तो यह है कि पाना ही नहीं चाहती है। भूत और दानव से क्यों छुटकारा पाना चाहेगी। सरकार कहती तो सदा यही रहती है कि दोनों से अपनी पूरी ताकत से निपटेगी, पर वो खुद निपट जाती है, सच तो यह है कि पट जाती है।
महंगाई का चिल्लाना सरकार सह नहीं सकती है, इसकी चिल्लाहट से सरकार के संकट में घिरने भय रहता है इसलिए साईलेंट किलर की तरह सक्रिय रखा जाता है और जनता चिल्लाती रहती परंतु सरकार उस ओर से बेफिक्र है, यह बेफिक्री पांच साल के लिए तय है। सरकार सब कुछ बर्दाश्त कर सकती है परंतु महंगाई का रोना उसे स्वीकार्य नहीं है।
भ्रष्टाचार तो अनेक रूपों में मौजूद है। आप किस किसको हटायेंगे। दूसरों को हटाते हटाते अपना मुख भी उन्हीं में दिखलाई देगा और आप हटाते हटाते शर्मा जायेंगे, फिर नहीं हटा पायेंगे और भ्रष्टाचार को हटाने के कार्य से खुद ही किनारा कर जायेंगे। भ्रष्ट आचार रिश्वत भी है, तीखा बोलना भी है, झूठ बोलना भी है और सच्चाई जानते हुए मौन रहना भी भ्रष्ट आचार ही माना गया है। भ्रष्टाचार का दायरा बहुत व्यापक है। जितने रियलिटी शो हैं, सब भ्रष्टाचार के नये नये खुले अड्डे है। क्रिकेट तो ऐसा खेल है, जिसमें जब तक भ्रष्टाचार न शामिल हो, उसमें भरपूर रंग-तरंग का अहसास ही नहीं होता है।
फिर भ्रष्टाचार एक ऐसा भूत है, जो अतीत है, पर सामने मौजूद है, मतलब वर्तमानीय भूत। आज भी और अतीत भी तथा भविष्य भी। इस भूत की पेड़ पर उल्टी लटक इतनी मजबूत है कि पेड़ टूट जाए, पर इसकी अकड़ इतने गहरे तक पैठ चुकी है कि जाती नहीं । अतीत, वर्तमान और भविष्य में अपनी पूरी चमक दमक के साथ मौजूद भ्रष्टाचार भूत होते हुए भी मौजूद हैं। सबके अपने भरपूर भरे-पूरे जलवे हैं।
महंगाई को दानव बतलाया जा रहा है, जबकि वो स्त्रीलिंग है और स्त्रीलिंग होते हुए भी महंगाई की मजबूती प्रत्येक प्रकार के देवता और पुरूष दोनों को मात करती है, इसलिए दानव कहलाई जाती है। वरना इसे दानवी भी कहा जा सकता था, अभी तक तो यूं ही लगता था कि दानव से दानवी अधिक शक्तिशाली होती है परंतु महंगाई को दानव कहकर यह मिथक भी तोड़ डाला गया है।
मिथक मिथ्या होते हुए भी संस्कृति और मन में इस कदर बस जाते हैं कि वे आरंभ से रचे हुए नजर आते हैं। फिर भी यह पता लगाना बहुत मुश्किल होता है कि वे आरंभ हुए थे, ऐसा जान पड़ता है, मानो सृष्टि-संस्कृति का अटूट रिश्ता हों और उनसे निजी रिश्ते बन जाते हैं जो कभी मिट नहीं पाते हैं।
महंगाई और भ्रष्टाचार को भूत और दानव बतलाकर ऐसी जुगलबंदी को बेनकाब किया गया है, जो पहले से ही निर्वस्त्र है परंतु इसका श्रेय लूटने से भला सरकार क्यों वंचित रहे।
होली पर गुब्बारे मर रहे हैं
| http://www.dlamedia.com/epapermain.aspx |
आज से पांचवें दिन अधिकृत तौर पर होलीमय होंगे पर होली तो पहले से ही खेली जा रही है। जाट रेल पटरियों को खाट मानकर ठाठ से उन पर लेट लेट कर रेलें लेट कर रहे हैं और होली खेल रहे हैं। उनका मानना है कि आरक्षण के लिए लोहे की काली काली रेलों की पटरी पर लोट लगाकर क्षरण संभव है। वैसे वे खेतों के मालिक हैं, वहीं पर खूब लोट लगाते हैं। वहां पर उनके सब्जबाग हरे हरे हैं, जिन्हें वे फलबाग समझ कर बाग बाग हो रहे हैं। इधर राजधानी में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लाल रंग की होली खेली गई है, जो अगले दिन भी जारी रही और वैसे तो सड़कों पर वाहन तो रोजाना ही लाल रंग से होली खेल रहे हैं। उनके चालकों के लिए रक्त लाल रंग से अधिक महत्व नहीं रखता है। लेकिन सजा का नाम सुनकर सबके चेहरे पीले पड़ जाते हैं। इस प्रकार काला, हरा, लाल, पीला और सर के ऊपर का आसमान नीला मिलकर होली का अद्भुत समां बांध रहे हैं।
होली के साथ हल्ला न हो तो होली का असली आनंद नहीं मिलता है। इसलिए जाट ठाठ से रेल पटरियों पर हल्ला मचा रहे हैं। वैसे हल्ला वे भी मचा रहे हैं जिनकी रेलें या तो रद्द की जा रही हैं या देरी से आ रही हैं। वैसे जाटों ने सुन लिया तो वे सक्रिय हो जायेंगे कि जब हम शान से पटरियों पर लेटे हुए हैं तो फिर रेलें देरी से भी कैसे पहुंच रही हैं। टिकट काऊंटरों पर अफरा-तफरी का माहौल है। टिकट कैंसिल करवा लें या न करवायें। जाटों को गुमान तक नहीं है कि जाट जब रेल पटरियों पर लेटे लेटे थक कर दिशा मैदान को चले जाते हैं तो चौक रेलें उन पटरियों पर से होकर गुजर जाती हैं और जो गुजर जाती हैं, वे लेट हो जाती हैं पर पहुंच जाती हैं।
कोई इंसान निबुर्द्धि हो तो हो पर रेलें नहीं हैं कि इंसान के उपर से निर्मम होकर गुजर जायें। जाटों का रेल पटरियों पर लेटना, रेलों के लेट होने से अलग है, पर कौन समझाये। पीएम तो मजबूर हैं। वे कुछ करेंगे नहीं। वे लेट भी नहीं सकते क्योंकि वे जाट नहीं हैं। पीएम लेटे हुए हर स्थिति पर निगाह रख नहीं सकते, इसलिए कुर्सी पर मजबूर हैं। आप देख रहे हैं कि हमारे देश में एकाएक लेटना और मजबूर होना गति पकड़ चुका है। समझा जा रहा है कि इस पर ब्रेक भी नहीं लगाया जा सकता परंतु चैनल सक्रिय हैं, वे ब्रेक नहीं लगा पाते परंतु मजबूर नहीं हैं इसलिए ब्रेकिंग न्यूज जरूर जारी कर देते हैं, इस कार्य में वे लेट नहीं होते हैं।
इस प्रकार होली का मौसम है। दीवाली पर पर्यावरण का धुंआ उड़ाया जाता है। होली पर गुब्बारे मारे जाते हैं, पर जिन्हें मारे जाते हैं, वे जीवित रहते हैं, थोड़ा सा उनका रंग बदल जाता है, कुछ मस्ती का रंग चढ़ जाता है और गुब्बारे मर जाते हैं।
इसे क्या समझूं मैं ??????????????
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क्या सिर्फ 6 प्रतिशत जीवन ही बचा है, इस मेल का अथवा यह संकेत है मेरे जीवन का ???
दैनिक जागरण में खटीमा में आयोजित हिन्दी ब्लॉगरों के सम्मेलन की गूंज
![]() |
| http://sanskaardhani.blogspot.com/ |
मेरे जन्मदिन को हंसीदिवस के रूप में मनायें , खूब खिलकर खिलखिलायें
हंसना ही जिंदगी है
हंसाना ही वंदगी है
वही तो कर रहा हूं
हंस कर, हंसा कर
सबके दांत मुंह से
बाहर कर रहा हूं
हंसे हंसाये
खिलें खिलखिलायें
बिना दांतों के भी
हंसी को मुंह में
बंदी न बनायें
वंदना करें हंसी की
पूजा करें हंसी की
रचना करें हंसी की
सरंचना करें हंसी की
हंसी जो खुशी है
खुशी सदा हंसी है
अब तक जिन्होंने दी है जन्मदिन पर मेरे शुभकामना, नहीं भी दी है पर लाईन में लगे हैं, बहुत सारे तो अपनी नींद में बेसुध सोये हैं, जागकर देंगे, यह निश्चय कर के सोये हैं, सबका नंबर आयेगा, पर मैं तो कुछ काम कर लूं, धन्यवाद, शक्रिया, खुशामदीद अपना सबको अर्पण कर दूं।
हंसाना ही वंदगी है
वही तो कर रहा हूं
हंस कर, हंसा कर
सबके दांत मुंह से
बाहर कर रहा हूं
हंसे हंसाये
खिलें खिलखिलायें
बिना दांतों के भी
हंसी को मुंह में
बंदी न बनायें
वंदना करें हंसी की
पूजा करें हंसी की
रचना करें हंसी की
सरंचना करें हंसी की
हंसी जो खुशी है
खुशी सदा हंसी है
अब तक जिन्होंने दी है जन्मदिन पर मेरे शुभकामना, नहीं भी दी है पर लाईन में लगे हैं, बहुत सारे तो अपनी नींद में बेसुध सोये हैं, जागकर देंगे, यह निश्चय कर के सोये हैं, सबका नंबर आयेगा, पर मैं तो कुछ काम कर लूं, धन्यवाद, शक्रिया, खुशामदीद अपना सबको अर्पण कर दूं।
इसे फेसबुक पर पोस्ट कर रहा था, पर उसने मना कर दिया।
अमिताभ बच्चन का अंगूठा दैनिक हिन्दी मिलाप, हैदराबाद में 30 अक्टूबर 2010
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| http://avinashvachaspati.blogspot.com/2010/10/blog-post_7096.html |
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