छपन छपाई
हिन्दी ब्लॉगिंग के विशाल संसार में मेरा छोटा सा छापाखाना
दौड़ा दौड़ा दौड़ा ... कुत्ता दुम दबाकर दौड़ा : दैनिक हिंदी मिलाप में 31 अक्टूबर 2011 को प्रकाशित
तानाशाही का शाही ताना, पड़ गया जाना * दैनिक जनसंदेश टाइम्स में 30 अक्टूबर 2011 को प्रकाशित
तानाशाह की विदाई हुई संपन्न : दैनिक जनवाणी के 25 अक्टूबर 2011 अंक में पेज 14 पर प्रकाशित
नकली दीवाली बनाम असली दीवाला : दैनिक हिंदी मिलाप के 25 अक्टूबर 2011 के अंक में प्रकाशित
नोबल पुरस्कार के लिए मेरा रोना : दैनिक जनसंदेश टाइम्स 23 अक्टूबर 2011 के अंक में व्यंग्य लोक पन्ना में प्रकाशित
आओ पीएम बनने के लिए दौड़ लगायें : दैनिक हिंदी मिलाप में 22 अक्टूबर 2011 को प्रकाशित
चप्पल की तहजीब : दैनिक जनसंदेश टाइम्स में 21 अक्टूबर 2011 को प्रकाशित
यह तो हौसले की बात है : दैनिक जनवाणी में 20 अक्टूबर 2011 के अंक में प्रकाशित
अब तो रोना भी ग्लोबल : दैनिक हिंदी मिलाप में 17 अक्टूबर 2011 को प्रकाशित
सब खेल रहे खेल : दैनिक जनवाणी 11 अक्टूबर 2011 के अंक में प्रकाशित
एक आधुनिक पंचतंत्र कथा : दैनिक जनसंदेश टाइम्स में 9 अक्टूबर 2011 को प्रकाशित
हे रावण या जय भ्रष्टाचार : दैनिक हिंदी मिलाप में 8 अक्टूबर 2011 के अंक में प्रकाशित
सपना अपना तो हनी-हनी : दैनिक जनवाणी में 4 अक्टूबर 2011 को प्रकाशित
http://www.janwani.in/Details.aspx?article=True&boxid=1288546&ID=11638
हाकी की तल्खियां बन गई सुर्खियां : दैनिक डीएलए में 29 सितम्बर 2011 के अंक में प्रकाशित
पब्लिक थी बेहाल, जादू की छड़ी ने किया कमाल : दैनिक हिंदी मिलाप में 29 सितम्बर 2011 के अंक में प्रकाशित
शेर जो न डरे और न मरे : डीएलए में 27 सितम्बर 2011 के अंक में प्रकाशित
पब्लिक को जादू की छड़ी मुबारक : दैनिक जनवाणी में 27 सितम्बर 2011 को प्रकाशित
पब्लिक को जादू की छड़ी मुबारक
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दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में अभिव्यक्ति से एक रचना भिखारियों से सहूलियत
वोटर का कैरेक्टर सबसे ढीला है : दैनिक लोकसत्य में 26 सितम्बर 2011 को प्रकाशित व्यंग्य
अमिताभ अमर संवाद : दैनिक हिंदी मिलाप में 24 सितम्बर 2011 के अंक में प्रकाशित
बड़े-छोटे संवाद : दैनिक जनसंदेश टाइम्स में 24 सितम्बर 2011 के अंक में प्रकाशित
बम कृति, भूकंप प्रकृति और हड़कंप निवृत्ति : डीएलए में 22 सितम्बर 2011 के अंक में प्रकाशित
तल्खियां बन गई सुर्खियां : दैनिक जनवाणी 20 सितम्बर 2011 में प्रकाशित व्यंग्य
आइए इस देश में मास्टर बन कर देखें : पीपुल्स समाचार में 20 सितम्बर 2011 को प्रकाशित
काला नहीं, चोखा है नाव का धंधा : डीएलए में 20 सितम्बर 2011 के अंक में प्रकाशित व्यंग्य
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